जगत में मुफ्त कुछ भी नहीं है| हर वो शय या सेवा जिसका हम प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से उपभोग करते हैं, उसका भुगतान करते हैं| उदाहरण स्वरुप, एक पार्किंग की जगह का एक निश्चित समयावधि के उपभोग के एवज में शुल्क दिया जाता है| कूरियर से सामान भेजते वक़्त सामान के वज़न का और प्राप्तकर्ता तक तयशुदा दूरी का, एक निश्चित शुल्क देना पड़ता है| जब आप किसी से उधार लेते हैं, देनदार आपसे उधार की निश्चित राशि और समयावधि का शुल्क वसूल करता है| यह शुल्क मूल राशि का एक निश्चित प्रतिशत स्वरुप होता है, जो अमूमन एक वर्ष के लिए निर्दिष्ट होता है और ब्याज दर कहलाता है|
बैंक, कंपनियां और सरकारी संस्थाएं जनता से इस प्रकार डेब्ट फंड्स (ऋण धन) जुटाती हैं और इस पूँजी का अपने