पॉवर ऑफ़ कंपाउंडिंग बहुतों को एक मुश्किल शीर्षक जान पड़ेगा| ऐसा कतई नहीं है और इसे सरलता से समझने में हम आपकी मदद करेंगे|
आइये ये मान कर चलें की किसी ने रुपये 10000/- @ 8% के हिसाब से निवेश किया है| सालाना सूद 800/- होगा| तथापि, जब सूद उसी निवेश में पुनः निवेशित होता है, अगले साल की उपार्जित आमदनी में न केवल मूल 10000/- अपितु 800/- का अतिरिक्त निवेश भी दर्शायेगा, अतः दूसरे वर्ष ये राशि 864/- होगी| जैसे जैसे सालों की वृद्धि होगी, सालाना सूद में भी वृद्धि होगी क्योंकि हर साल अतिरिक्त निवेश भी हो रहा है|
एक निर्दिष्ट समयावधि के बाद, कितनी राशि एकत्रित होगी, अगर सालाना प्रतिफल/रिटर्न निवेशित होता है?
निवेश- 10000/-
रिटर्न/प्रतिफल दर: 8%
ये तालिका एक दिलचस्प मिसाल है| निवेश अवधि
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