पूरी तरह से स्कीम के पोर्टफोलियो से जुड़ी निवेश गतिविधियों से म्यूचुअल फंड को होने वाले लाभ में से डिविडेंड का भुगतान किया जाता है और ट्रस्टी के निर्णय के अनुसार ऐसा किया जाता है। अगर गिरते हुए बाज़ार में स्कीम को नुकसान होता है, तो ट्रस्टी डिविडेंड का भुगतान करने की घोषणा न करने का निर्णय ले सकते हैं। चूँकि डिविडेंड एक लाभ या आय होती है, इसलिए उसे कराधीन माना जाता है और डिविडेंड लगने वाले टैक्स को डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स (DDT) कहा जाता है। पहले डिविडेंड पर स्रोत पर टैक्स लगता था, यानि निवेशकों को डिविडेंड वितरित करने से पहले स्कीम को DDT का भुगतान करना पड़ता था। बेशक इससे डिविडेंड के भुगतान की राशि घट जाती थी, लेकिन निवेशकों के पास पहुँचने पर वह टैक्स-फ्री होता
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