रिस्क-ओ-मीटर, म्यूचुअल फंड के लिए सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (सेबी) द्वारा शुरू किया गया एक मानकीकृत रिस्क मेज़रमेंट स्केल है। सभी म्यूचुअल फंड योजना दस्तावेजों में रिस्क-ओ-मीटर को शुरुआत में और बिल्कुल साफ़-साफ़ दिखाना होगा ताकि निवेशकों को उस खास फंड से जुड़े रिस्क का पता चल सके।
रिस्क-ओ-मीटर, रिस्क को छह अलग-अलग लेवल में वर्गीकृत करता है। इनमें लो, लो से मॉडरेट, मॉडरेट, मॉडरेटली हाई, हाई और वेरी हाई शामिल हैं। बाईं ओर दिए गए चित्र को देखें।
लो रिस्क: इस कैटेगरी के अंतर्गतआने वाले फंड्स में, उनकी मुख्य सिक्योरिटीज़ के कारण सबसे लो रिस्क होता है, जो उन्हें कुछ हद तक उन निवेशकों के लिए उपयुक्त बनाता है, जो अपनी पूंजी को सुरक्षित रखना चाहते हैंl
लो से मॉडरेट रिस्क: ये उन निवेशकों के लिए हैं, जो मध्यम
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